व्यवहार बनाये रखने पर शिक्षा चर्चा!

कर्मचारियों को देखते थे तब वे उन्हें बड़े रोब से नियम के बारे में बताते थे और उन्हें मानने पर मजबूर करते थे इसके कारण उन्हें रुखा व्यवहार मिलता था और उनके जाते ही कर्मचारी टोप उतार लेते थे! तब उन्होंने दूसरा तरीका निकाला। अगली बार जब वे कर्मचारियों को बिना टोप के देखते थे, तो उनसे पूछते थे क्या टोप को पहनने में परेशानी है? तब वे बड़े सहज अंदाज में उन्हें कहते थे कि ये टोप उनकी सुरक्षा के लिए हैं और टोप पहनने से उनका ही भला है। इस कारण से लोग उनकी बात बिना बुरा माने मानने लगे! आप इतिहास के हजारों पन्नों में आलोचना की निरर्थकता के उदाहरण देखेंगे। थियोडोर रुजवेल्ट और प्रेसिडेंट टाफ्ट के प्रसिद्ध झगड़े का उदाहरण लीजिए। एक ऐसा झगड़ा, जिसने रिपब्लिकन पार्टी को तोड़ डाला, जिसने वुडरो विल्सन को व्हाइट हाउस में डाला, जिसने प्रथम विश्वयुद्ध में अपना प्रभाव दिखाया और जिसने इतिहास को एक नया मोड़ दिया। जब थियोडोर रुजवेल्ट व्हाइट हाउस से सन् 1908 में निकले, तो उन्होंने टाफ्ट को सपोर्ट किया, जो प्रेसिडेंट के लिए चुने गए, फिर थियोडोर रुजवेल्ट शेरों का शिकार करने अफ्रीका चले गए। जब वे लौटे तो उबल पड़े। उन्होंने टाफ्ट की रुढ़िवादिता के लिए आलोचना की, तीसरे टर्म के लिए अपनी उम्मीदवारी निश्चित की, बिल मूज पार्टी बनाई और जी.ओ.पी को खत्म कर दिया। अगले चुनाव में विलियम हॉवर्ड टाफ्ट और रिपब्लिकन पार्टी सिर्फ दो राज्यों में चुनाव जीती-वर्मांट और उतह। ऐसी करारी हार पार्टी ने कभी नहीं देखी थी!

थियोडोर रुजवेल्ट ने टाफ्ट को दोष दिया, लेकिन क्या प्रेसिडेंट टाफ्ट ने खुद को दोष दिया? आंखों में आंसू भरकर टाफ्ट ने कहा-“मुझे नहीं पता कि मैं किसी और तरीके से अपने काम को कैसे कर सकता था।” किसका दोष था? थियोडोर रुजवेल्ट या टाफ्ट? मेरा कहना यह है कि थियोडोर रुजवेल्ट की आलोचना कभी भी टाफ्ट को यह नहीं समझा पाई कि गलती उनकी थी। इससे टाफ्ट ने अपना बचाव किया और नम आंखों से बोले-“मुझे नहीं पता मैं किसी और तरीके से अपने काम को कैसे कर सकता था।” टीपॉट डोम ऑइल घोटाले को लीजिए-सन् 1920 के दशक में इससे अखबार रंगे रहते थे। इसने देश को हिला दिया था!

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