प्रशंशा करने पर शिक्षा चर्चा!

विचार यह है कि आपके पास जो भी हो, आप जहाँ भी हों, खेल में उतर ना। मैं इसे गलियारे (corridor) में प्रवेश करना कहता हूँ। मिसाल के तौर पर बरसों पहले मैं फ़ोर्ट लॉडरडेल, फ्लोरिडा में रात्रिकालीन डेज़र्ट कैफ़े खोलने की योजना बना रहा था। मैंने जगह के विकल्पों और बाज़ार का अध्ययन किया। इसके साथ ही मैंने पता लगाया कि मुझे किन सामानों की ज़रूरत है। मैंने केक, पाई, आइसक्रीम और कॉफ़ी के उपलब्ध प्रकारों पर भी शोध किया। नतीजा क्या निकला ? पहली बड़ी समस्या – मैं मोटा हो गया! शोध के चक्कर में खाने-पीने से मुझे कोई मदद नहीं मिली थी। तो मैंने खुद से पूछा, “हार्व, इस बिज़नेस का अध्ययन करने का सबसे अच्छा तरीक़ा क्या है ?” फिर मैंने हार्व नाम के इस आदमी की बात सुनी, जो ज़ाहिर है मुझसे ज़्यादा स्मार्ट था, “अगर आप सचमुच किसी व्यवसाय की बारीक़ियाँ सीखना चाहते हैं, तो उसमें उतर जाएँ। आपको पहले दिन से ही उसका मालिक बनने की ज़रूरत नहीं है। उस बिज़नेस में नौकरी कर लो और गलियारे में पहुँच जाओ। आप किसी रेस्तराँ में झाडू लगाकर या बर्तन मांजकर उसके बारे में जितना जानेंगे, उतना बाहर रहकर दस साल के शोध में भी नहीं जान पाएँगे।” (मैंने आपको बताया था ना कि वह मुझसे बहुत स्मार्ट था।) और मैंने यही किया। मैंने मदर बटलर्स पाई शॉप में नौकरी कर ली। काश! मैं आपको बता सकता कि उन्होंने तत्काल मेरे बेहतरीन गुणों को पहचान लिया और पहले दिन ही मुझे सीईओ बना दिया। लेकिन न जाने क्यों, वे मेरे प्रशासनिक नेतृत्व गुणों को नहीं देख पाए या उन्होंने उनकी परवाह ही नहीं की और इसलिए मैंने बसबॉय के रूप में काम शुरू किया। हाँ, फ़र्श पर झाड़ लगाना और जूठे बर्तन हटाना!

इरादे की शक्ति भी कितने मज़ेदार ढंग से काम करती है, है ना? आपको लग रहा होगा कि यह काम करने के लिए मुझे अपने आत्मसम्मान को भूलना पड़ा होगा, लेकिन सच्चाई तो यह है कि मैंने इसे इस तरह से देखा ही नहीं। मैं तो डेज़र्ट बिज़नेस सीखने के मिशन पर था। मैं किसी दूसरे के “टिकट” पर मिले सीखने के इस अवसर के लिए कृतज्ञ था और इस बात पर भी कि मुझे जेबख़र्च के लिए थोड़ी चिल्लर भी मिल रही थी। बसबॉय के अपने काम के दौरान मैंने मैनेजर से बातचीत करने में ज़्यादा वक़्त लगाया!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *