चिंतन करने पर शिक्षा चर्चा!

मैं आपसे पूछता हूँ, आपके पास “केक” होने का क्या फ़ायदा, अगर आप उसे खा न सकें आप इसका और क्या कर सकते हैं ? अलमारी में सजाकर इसकी ओर ताकते रहें? केक खाने और मज़े लेने के लिए ही बना है। यह/वह चिंतन उन लोगों को भी धूल चटा देता है, जो मानते हैं कि “अगर मेरे पास ज़्यादा होगा, तो किसी और के पास कम होगा।” एक बार फिर कहना पडेगा, यह डर पर आधारित, खुद को पराजित करने वाली प्रोग्रामिंग अमीर लोग यक़ीन करते हैं, “आपके पास केक भी रहे और आप उसे खा भी सकें।” मध्य वर्गीय लोग यक़ीन करते हैं, “केक से मोटापा बढ़ता है, इसलिए मैं इसका बस छोटा सा टुकड़ा ही लूँगा।’ ग़रीब लोग यक़ीन करते हैं कि वे केक के हक़दार नहीं हैं, इसलिए वे डबलरोटी का ऑर्डर देते हैं, उसके छिद्रों पर ध्यान केंद्रित करते हैं और सोचते हैं कि क्यों उनके पास “कुछ भी नहीं” है! “दोनों” चीजें पाने के लिए सोचने और ऐसा करने के तरीके खोजने का अभ्यास करें। जब भी आपके सामने विकल्प प्रस्तुत किए जाएँ, तो खुद से पूछे, “मैं दोनों कैसे पा सकता हूँ?” जागरूक बनें कि धन का प्रवाह हर व्यक्ति के जीवन में मूल्य बढ़ाता है। जब भी आप पैसा खर्च करें, तो खुद से कहें, “यह पैसा सैकड़ों लोगों के पास से गुज़रेगा और सबके मूल्य में वृद्धि करेगा।” खुद को दूसरों का रोल मॉडल मानें – दिखाएँ कि आप दयालु, उदार, प्रेमपूर्ण और अमीर बन सकते हैं! जब पैसे की बात आती है, तो हमारे समाज में लोग आम तौर पर यह सवाल पूछते हैं, “आपकी आमदनी कितनी है ?” आप यह सवाल बहुत कम सुनते हैं, “आपकी नेट वर्थ कितनी है ?” बहुत कम लोग इस तरह से बात करते हैं। ज़ाहिर है, इस तरह की बात अमीरों के कंट्री क्लब में ही सुनाई देती है। कंट्री क्लब्स में वित्तीय चर्चा लगभग हमेशा नेट वर्थ पर केंद्रित होती है “जिम ने हाल ही में अपने स्टॉक ऑप्शन बेचे हैं। उसकी नेट वर्थ तीन मिलियन से ज़्यादा हो गई है!

पॉल की कंपनी अभी-अभी सार्वजनिक हुई है। अब उसकी नेट वर्थ आठ मिलियन हो गई है। स्यू ने अपना बिज़नेस बेच दिया है। उसकी नेट वर्थ अब बारह मिलियन हो गई है।” कंट्री क्लब में आप यह नहीं सनेंगे, “हे, क्या तुमने सुना कि जो की तनख्वाह बढ़ गई है ? हाँ, और दो प्रतिशत जीवन-निर्वाह भत्ता अलग से ?” अगर आप यह सुनते हैं, तो आप समझ जाते हैं कि उस दिन वहाँ कोई मेहमान आया है, जो ऐसी बातें बोल रहा है!

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