अमीरी होने पर शिक्षा चर्चा!

एक सामान्य है, अन्य विशेष तरह का है। सामान्य ज्ञान, कोई फर्क नहीं पड़ता कि यह कितनी बड़ी मात्रा या किस्म में हो सकता है, धन का संचय करने में इसका बहुत कम इस्तेमाल है। सभ्यता में सामान्य ज्ञान के जितने भी कुल व्यावहारिक रूप ज्ञात हैं, वे सब महान विश्वविद्यालयों के संकायों के पास हैं। अधिकतर प्रोफेसरों के पास धन बहुत कम या बिल्कुल भी नहीं है। वे ज्ञान के शिक्षण के विशेषज्ञ होते हैं, लेकिन वे ज्ञान के संगठन, या उपयोग के विशेषज्ञ नहीं होते हैं। ज्ञान धन को तब तक आकर्षित नही करेगा जब तक कि यह धन के संचय के निश्चित अंत तक कार्रवाई की व्यावहारिक योजनाओं के माध्यम से संगठित और समझदारी से निर्देशित नही होता है। इस तथ्य की समझ की कमी लाखों लोगों के भ्रम का स्रोत रही है, जो इस गलत धारणा को मानते हैं कि “ज्ञान शक्ति है।” ऐसा कुछ भी नहीं है! कि ज्ञान ही संभावित शक्ति है। यह शक्ति केवल तब बनता है जब, और यदि इसे निश्चित योजनाओं में संगठित किया जाये और एक निश्चित अंत तक निर्देशित किया जाये। आज सभ्यता को ज्ञात शिक्षा की सभी प्रणालियों में इस “लापता कड़ी” को शिक्षण संस्थानों द्वारा अपने छात्रों को यह सिखाने में मिली विफलता में पाया जा सकता है कि ज्ञान को प्राप्त करने के बाद उसे व्यवस्थित और प्रयोग कैसे करें!

बहुत से लोग यह सोचने की गलती करते हैं कि चूंकि हेनरी फोर्ड की “स्कूली शिक्षा, बहुत थोड़ी थी, वह एक शिक्षित आदमी नहीं है, वे लोग जो यह गलती करते हैं, वे हेनरी फोर्ड को नही जानते, न ही वे “एजुकेट” का वास्तविक अर्थ समझते हैं! यह शब्द लैटिन शब्द “एडुको” से लिया गया है, जिसका अर्थ होता है, बाहर लाना या भीतर से विकसित करना होता है तो दोस्तों बस आज के लिए इतना ही मिलते है अगले पोस्ट में!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *